सूरजकुंड मेला सुरक्षा, स्वच्छता और सौहार्द की मिसाल बना

नई दिल्ली, 23 फरवरी। 38 वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महाकुम्भ रविवार की शाम उत्साह और उमंग के साथ विधिवत रूप से संपन्न हुआ। इस मेले ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विविधता, हस्तशिल्प, पारंपरिक लोक कलाओं और खानपान की विविधता से लाखों लोगों को आकर्षित किया। 17 दिनों तक चले इस मेले में लाखों की संख्या में देश- विदेश के पर्यटकों ने शिरकत की और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। सभी स्टॉल संचालकों, शिल्पकारों और कलाकारों ने हरियाणा सरकार द्वारा किए गए बेहतरीन प्रबंधों की सराहना की। प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाएं जैसे स्वच्छता, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और सुविधाजनक प्रवेश-निकास व्यवस्था ने इस मेले को और भी यादगार बना दिया।
सूरजकुंड मेला कला और संस्कृति को वैश्विक मंच प्रदान करता है।
देश-विदेश से आए पर्यटकों ने इस मेले में अपनी भागीदारी को शानदार अनुभव बताया। विदेशी मेहमानों ने भारतीय हस्तशिल्प और संस्कृति के प्रति अपनी गहरी रुचि व्यक्त की। जैसे ही सूरजकुंड मेले का समापन हुआ, कलाकारों, स्टॉल संचालकों और पर्यटकों ने अगली बार फिर मिलने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि यह मेला न केवल संस्कृति और व्यापार के लिए बल्कि परस्पर संवाद और सौहार्द के लिए भी एक बेहतरीन मंच है।
विदेशी कलाकारों ने रखी मांग
थाईलैंड की सिंगकाई बैंड की संचालक अरूणो थाई और उनकी टीम ने कहा कि वे पहली बार सूरजकुंड मेले में आए है। यहां आकर विश्व भर के देशों की संस्कृति और परंपरा को मंच के माध्यम से देखने का अवसर मिला है। वहीं भारत के लजीज व्यंजनों के वह दीवाने हो गए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा से उन्होंने सूरजकुंड मेला में बार-बार बुलाने का आह्वान किया है।
पर्यटकों को खूब लुभाया सूरजकुंड मेला :
मलावी देश की पर्यटक एवं स्टॉल संचालक एंजेला और उनके सहयोगी रजब ने कहा कि वह सूरजकुंड मेले में पहली बार आए हैं। यहां पर देश-विदेश की संस्कृति और शिल्पकारी उन्हें बेहद पसंद आई। गोवा की पर्यटक फरजाना सैयद ने कहा कि सूरजकुंड मेले का अनुभव काफी अच्छा रहा। आगे भी वह इस अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में आती रहेंगी। यहां का खान-पान और लोक संस्कृति उनके मन को भाया है। वह अपने परिजनों और साथियों को अगले साल लगने वाले सूरजकुंड मेले में साथ लेकर आएंगी।